hanuman chalisa in hindi pdf 2022

hanuman chalisa in hindi pdf हनुमान चालीसा इन हिंदी pdf  डाउनलोड भी कर सकते है और पढ़ भी सकते हो पूरा हिंदी अनुवाद के साथ | hanuman chalisa in hindi pdf

hanuman chalisa in hindi pdf

हनुमान चालीसा पाठ
|| दोहा ||
श्रीगुरु िरन सरोज रज, ननज मनु मुकु रु सुधारर।
बरनऊं रघुबर नबमल जसु, जो दायकु फल िारर।।
बुनद्धहीन तनु जाननके, सुनमर ं पवन-कुमार।
बल बुनद्ध नबद्या देहु मोनहं, हरहु कलेस नबकार।।
|| चौपाई ||
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस नतहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुचलत बल धामा। अंजनन-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर नबक्रम बजरंगी। कु मनत ननवार सुमनत के सं गी।।
कं िन बरन नबराज सुबेसा। कानन कुं डल कुं चित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा नबराजै। कांधे मूं ज जनेऊ साजै।।
सं कर सुवन के सरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
नवद्यावान गुनी अनत िातुर। राम काज कररबे को आतुर।।
प्रभुिररत्र सुननबे को रचसया। राम लखन सीता मन बचसया।।
सूक्ष्म रूप धरर चसयनहं नदखावा। नबकट रूप धरर लं क जरावा।।
भीम रूप धरर असुर सं हारे। रामिं द्र के काज सं वारे।।

hanuman chalisa in hindi pdf

लाय सजीवन लखन चजयाये। श्रीरघुबीर हरनष उर लाये।।
रघुपनत कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम नप्रय भरतनह सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कनह श्रीपनत कंठ लगावैं।।
सनकानदक ब्रह्मानद मुनीसा। नारद सारद सनहत अहीसा।।
जम कु बेर नदगपाल जहां ते। कनब कोनबद कनह सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवनहं कीन्हा। राम नमलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मं त्र नबभीषन माना। लं के स्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो तानह मधुर फल जानू।।
प्रभुमुनद्रका मेचल मुख माहीं। जलचध लांनघ गयेअिरज नाहीं।।
दुगवम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा नबनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत नपसाि ननकट ननहं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत ननरंतर हनुमत बीरा।।
सं कट तेंहनुमान छुड़ावै। मन क्रम बिन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। नतन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अनमत जीवन फल पावै।।
िारों जुग परताप तुम्हारा। है परचसद्ध जगत उचजयारा।।
साधु-सं त के तुम रखवारे। असुर ननकं दन राम दुलारे।।

hanuman chalisa in hindi pdf

अष्ट चसनद्ध न ननचध के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपनत के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख नबसरावै।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरर-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सबव सुख करई।।
सं कट कटै नमटै सब पीरा। जो सुनमरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृ पा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटनह बं नद महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान िालीसा। होय चसनद्ध साखी ग रीसा।।
तुलसीदास सदा हरर िेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
|| दोहा ||
पवन तनय सं कट हरन, मं गल मूरनत रूप।
राम लखन सीता सनहत, हृदय बसहु सुर भूप।।

hanuman chalisa pdf in hindi

hanuman chalisa in hindi pdf

हिंदी अनुवाद सहित
|| दोहा ||
श्रीगुरु िरन सरोज रज, ननज मनुमुकुरु सुधारर।
बरनऊं रघुबर नबमल जसु, जो दायकुफल िारर।।
अथव: श्री गुरूजी महाराज के िरण कमलों की धूचल सेअपनेमना रूपी
दपवण को पनवत्र करके श्री रघुवीर के ननमवल यश का न करता हूूँ, जो
िारों फल (धमव, अथव, काम और मोक्ष) देनेवाला है।

hanuman chalisa in hindi pdf

|| दोहा ||
बुनद्धहीन तनु जाननके, सुनमर ं पवन-कु मार।
बल बुनद्ध नबद्या देहु मोनह,ं हरहु कलेस नबकार।।
अथव: हेपवनकु मार! मैंआपका स्मरण करता हूूँ। आप तो जानतेहैंनक
मेरा शरीर और बुनद्ध ननबवल है। मुझेशारीररक बल, सद्बनद्धु एवं ज्ञान
दीचजए और मेरेदुः खों व दोषोंका नाश कर दीचजए।

|| चौपाई ||
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस नतहुं लोक उजागर।।
अथव: श्री हनुमानजी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह
है। हेकपीश्वर! आपकी जय हो। तीनोंलोकों(स्वगवलोक, भू-लोक और
पाताल-लोक) मेंआपकी कीनतवहै।

hanuman chalisa in hindi pdf

रामदूत अतुचलत बल धामा।
अंजनन-पुत्र पवनसुत नामा।।
अथव: हेपवनसुत अंजनीनन्दन! श्रीरामदूत! आपके समान, दूसरा कोई
बलवान नहीं है। hanuman chalisa in hindi pdf

महाबीर नबक्रम बजरंगी।
कु मनत ननवार सुमनत के संगी।।
अथव: हेमहावीर बजरंगबली! आप नवशेष पराक्रम वालेहैं। आप दुबुवनद्ध
को दूर करतेहैंऔर अच्छी बुनद्धवालोंके सहायक है।

कं िन बरन नबराज सुबेसा।
कानन कुं डल कुं चित के सा।।
अथव: आप सुनहलेरंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों मेंकु ण्डल और घुं घराले
बालोंमेंसुशोचभत हैं।

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हाथ बज्र औ ध्वजा नबराजै।
कांधे मूं ज जनेऊ साजै।
अथव: आपके हाथ मेंवज्र और ध्वजा हैतथा कन्धेपैर मूूँज का जनेउ
शोभायमान है।

सं कर सुवन के सरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
अथव: हेशं कर के अवतार। हेके सरी-नन्दन! आपके पराक्रम और महान
यश की सं सार भर मेंवन्दना होती है।

नवद्यावान गुनी अनत िातुर।
राम काज कररबे को आतुर।।
अथव: आप प्रकाण्ड नवद्याननधान हैं, गुणवान और अत्यन्त कायवकु शल
होकर श्रीराम-काज करनेकेचलएउत्सुक रहतेहैं।

hanuman chalisa in hindi pdf

प्रभु िररत्र सुननबे को रचसया।
राम लखन सीता मन बचसया।।
अथव: आप श्रीराम के िररत्र सुननेमेंआनन्द – रस लेतेहैं। श्री राम,
सीता और लक्ष्मण आपके हृदय मेंबसतेहैं।

सूक्ष्म रूप धरर चसयनहं नदखावा।
नबकट रूप धरर लं क जरावा।।
अथव: आपनेअपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता माूँको नदखाया
तथा भयं कर रूप धारण करके लं का को जलाया।

भीम रूप धरर असुर सं हारे।
रामिं द्र के काज सं वारे।।
अथव: आपने नवकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और
श्रीरामिि के उद्देश्ोंको सफल बनानेमेंसहयोग नदया।

hanuman chalisa in hindi pdf

लाय सजीवन लखन चजयाये।
श्रीरघुबीर हरनष उर लाये।।
अथव: आपने सं जीवनी बूटी लाकर लक्ष्मणजी को चजलाया? चजससे
श्रीरघुवीर नेहनषवत होकर आपको अपनेहृदय सेलगा चलया।

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रघुपनत कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम नप्रय भरतनह सम भाई।।
अथव: हेपवनसुत ! श्रीरामििजी नेआपकी बहुत प्रशं सा की और कहा
नक तुम मेरेभरत जैसेप्यारेभाई हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कनह श्रीपनत कं ठ लगावैं।।
अथव: श्री राम नेआपको यह कहकर हृदय सेलगा चलया नक तुम्हारा
यश हजार-मुख सेसराहनीय है। hanuman chalisa in hindi pdf

सनकानदक ब्रह्मानद मुनीसा।
नारद सारद सनहत अहीसा।।
अथव: श्री सनक, श्रीसनातन, श्रीसनत्कु मार आनद मुनन, ब्रह्मा आनद
देवता, नारदजी, सरस्वतीजी, शेषनागजी।

जम कु बेर नदगपाल जहां ते।
कनब कोनबद कनह सके कहां ते।।
अथव: यमराज, कु बेर आनद सब नदशाओं के रक्षक, कनव, नवद्वान,
पण्डण्डत या कोई भी आपके यश का पूरी तरह वणवन नहींकर सकते।

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तुम उपकार सुग्रीवनहं कीन्हा।
राम नमलाय राज पद दीन्हा।।
अथव: आपनेसुग्रीवजी को श्रीराम सेनमलाकर उपकार नकया, चजसके
कारण वेराजा बने!

तुम्हरो मं त्र नबभीषन माना।
लं के स्वर भए सब जग जाना।।
अथव: आपके उपदेश का नवभीषण नेपूणवतः पालन नकया, इसी कारण
लं का केराजा बने, इसको सब सं सार जानता है। hanuman chalisa in hindi pdf

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो तानह मधुर फल जानू।।
अथव: जो सूयव इतने योजन दूरी पर हैनक उस पर पहुूँिनेके चलए
हजारों युग लगें। उस हजारों योजन की दूरी पर सूयव को आपनेएक
मीठा फल समझ कर ननय कर ननगल चलया।

प्रभु मुनद्रका मेचल मुख माहीं।
जलचध लांनघ गये अिरज नाहीं।।
अथव: आपनेश्रीरामििजी की अंगूठी मुूँह मेंरखकर समुद्र को पार
नकया परन्तुआपकेचलए इसमेंकोई आश्चयवनहीं है।

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दुगवम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
अथव: सं सार मेंचजतनेभी कनठन काम हैं, वेसभी आपकी कृ पा से
सहज और सुलभ हो जातेहैं। hanuman chalisa in hindi pdf

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा नबनु पैसारे।।
अथव: श्रीरामििजी के द्वार के आप रखवालेहैं, चजसमेंआपकी आज्ञा
के नबना नकसी को प्रवेश नहीं नमल सकता। (अथावत्श्रीराम कृ पा पाने
केचलए आपको प्रसन्न करना आवश्क है।)

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।
अथव: जो भी आपकी शरण मेंआतेहैंउन सभी को आनन्द एवं सुख
प्राप्त होता है और जब आप रक्षक हैं, तो नफर नकसी का डर नहीं
रहता।

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आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
अथव: आपके चसवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता। आपकी
गजवना सेतीनोंलोक कांप जातेहैं।

भूत नपसाि ननकट ननहं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
अथव: हेपवनपुत्र आपका ‘महावीर’ हनुमानजी नाम सुनकर भूत-नपशाि
आनद दुष्ट आत्माऐं पास भी नहींआ सकतीं।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत ननरंतर हनुमत बीरा।।
अथव: वीर हनुमानजी! आपका ननरन्तर जप करनेसेसब रोग नष्ट हो
जातेहैंऔर सब कष्ट दूर हो जातेहैं।

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नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत ननरंतर हनुमत बीरा।।
अथव: वीर हनुमानजी! आपका ननरन्तर जप करनेसेसब रोग नष्ट हो
जातेहैंऔर सब कष्ट दूर हो जातेहैं।

सं कट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बिन ध्यान जो लावै।।
अथव: हे हनुमानजी! नविार करने में, कमव करने मेंऔर बोलने में
चजनका ध्यान आप मेंलगा रहता है, उनको सब दुः खों सेआप दूर कर
देतेहैं। hanuman chalisa in hindi pdf 

सब पर राम तपस्वी राजा।
नतन के काज सकल तुम साजा।
अथव: तपस्वी राजा श्रीरामििजी सबसेश्रेष्ठ हैं, उनके सब कायों को
आपनेसहज मेंकर नदया।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अनमत जीवन फल पावै।।
अथव: चजस पर आपकी कृ पा हो, ऐसी जीवन मेंकोई भी अचभलाषा करे
तो उसेतुरन्त फल नमल जाता है, जीव चजस फल केनवषय मेंसोि भी
नहींसकता वह नमल जाता हैअथावत्सारी कामनायेंपूरी हो जाती है।

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िारों जुग परताप तुम्हारा।
है परचसद्ध जगत उचजयारा।।
अथव: आपका यश िारों युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कचलयुग) में
फै ला हुआ है, सम्पूणवसं सार मेंआपकी कीनतवसववत्र प्रकाशमान है।

साधु-सं त के तुम रखवारे।
असुर ननकं दन राम दुलारे।।
अथव: हेश्रीराम के दुलारे! आप साधुऔर सन्तों तथा सज्जनों की रक्षा
करतेहैंतथा दुष्टोंका सववनाश करतेहैं। hanuman chalisa in hindi pdf

अष्ट चसनद्ध न ननचध के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
अथव: हेहनुमं त लालजी आपको माता श्री जानकी सेऐसा वरदान नमला
हुआ है, चजससेआप नकसी को भी ‘आठों चसनद्धयाूँ’ और ‘न ननचधयाूँ’
(सब प्रकार की सम्पनत्त) देसकतेहैं।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपनत के दासा।।
अथव: आप ननरन्तर श्री रघुनाथ जी की शरण मेंरहतेहैं, चजससेआपके
पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के चलए ‘राम-नाम’ रूपी
औषधी हैं। hanuman chalisa in hindi pdf

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राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपनत के दासा।।
अथव: आप ननरन्तर श्री रघुनाथ जी की शरण मेंरहतेहैं, चजससेआपके
पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के चलए ‘राम-नाम’ रूपी
औषधी हैं।

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तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख नबसरावै।।
अथव: आपका भजन करनेसेश्रीरामजी प्राप्त होतेहैंऔर जन्म-जन्मांतर
के दुः ख दूर होतेहैं।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरर-भक्त कहाई।।
अथव: अन्त समय श्री रघुनाथजी के धाम को जातेहैंऔर यनद नफर भी
मृत्युलोक मेंजन्म लेंगेतो भनक्त करेंगेऔर श्री राम भक्त कहलायेंगे।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सबव सुख करई।।
अथव: हेहनुमानजी! आपकी सेवा करनेसेसब प्रकार सेसुख – नमलते
हैं, नफर नकसी देवता की पूजा करनेकी आवश्कता नहींरहती।
सं कट कटै नमटै सब पीरा।
जो सुनमरै हनुमत बलबीरा।।
अथव: हेवीर हनुमानजी! जो आपका स्मरण करता है, उसके सब संकट
कट जातेहैंऔर सब पीड़ा नमट जाती है।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृ पा करहु गुरुदेव की नाईं।।
अथव: हेस्वामी हनुमानजी ! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप
मुझ पर कृ पालुश्री गुरूजी के समान कृ पा कीचजए।

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जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटनह बं नद महा सुख होई।।
अथव: जो कोई इस हनुमान िालीसा का स बार पाठ करेगा वह सब
बन्धनोंसेछूट जायेगा और उसेपरमानन्द नमलेगा।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय चसनद्ध साखी ग रीसा।।
अथव: भगवान शं कर नेयह िालीसा चलखवाया, इसचलए वेसाक्षी हैंनक
जो इसेपढ़ेगा उसेननश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

तुलसीदास सदा हरर िेरा।
कीजै नाथ हृदय मं ह डेरा।।
अथव: हेनाथ हनुमानजी। “तुलसीदास” सदा ही “श्रीराम” का दास है।
इसचलए आप उसके हृदय मेंननवास कीचजए।

|| दोहा ||
पवनतनय सं कट हरन, मं गल मूनतव रूप | राम
लखन सीता सनहत, हृदय बसहु सुर भूप ||
अथव: हेसं कटमोिन पवनकु मार! आप आनंद मं गलों के स्वरूप हैं, हे
देवराज! आप श्रीराम, सीताजी और लक्ष्मण सनहत मेरेहृदय मेंननवास
कीचजए।

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pdf  hanuman  chalisa  in  hindi

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संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ
बाल समय रनब भचक्ष चलयो तब, तीनहुं लोक भयो अंचधयारो ।
तानह सों त्रास भयो जग को, यह सं कट काहु सों जात न टारो ॥
देवन आन करर नबनती तब, छांनड़ नदयो रनब कष्ट ननवारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप, सं कटमोिन नाम नतहारो ॥ 1 ॥
बाचल की त्रास कपीस बसै नगरर,जात महाप्रभु पंथ ननहारो ।
ि ंनक महा मुनन शाप नदया तब,िानहय क न नबिार नबिारो ॥
के नद्वज रूप चलवाय महाप्रभु,सो तुम दास के शोक ननवारो ।
को ननहं जानत है जग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥2॥
अंगद के सं ग लेन गये चसय,खोज कपीस यह बैन उिारो ।
जीवत ना बचिह हम सो जु,नबना सुचध लाय इहाूँ पगुधारो ॥
हेरर थके तट चसंधु सबै तब,लाय चसया-सुचध प्राण उबारो ।
को ननहं जानत है जग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥3॥

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रावन त्रास दई चसय को सब,राक्षचस सों कनह शोक ननवारो ।
तानह समय हनुमान महाप्रभु,जाय महा रजनीिर मारो ॥
िाहत सीय अशोक सों आनग सु,दैप्रभुमुनद्रका शोक ननवारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥4॥
बाण लग्यो उर लचछमन के तब,प्राण तजेसुत रावण मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,तबै नगरर द्रोण सु बीर उपारो ॥
आनन सजीवन हाथ दई तब,लचछमन के तुम प्राण उबारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥5॥
रावण युद्ध अजान नकयो तब,नाग नक फांस सबैचसर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयोयह सं कट भारो ॥
आनन खगेस तबै हनुमान जु,बंधन कानट सुत्रास ननवारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥6॥
बं धु समेत जबै अनहरावन,लै रघुनाथ पाताल चसधारो ।
देनबनहं पूचज भली नबचध सों बचल,देउ सबैनमनत मं त्र नबिारो ॥
जाय सहाय भयो तब ही,अनहरावण सैन्य समेत सूँहारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो

hanuman chalisa in hindi pdf ॥7॥

काज नकये बड़ देवन के तुम,वीर महाप्रभु देचख नबिारो ।
क न सो सं कट मोर गरीब को,जो तुमसों ननहं जात हैटारो ॥
बेनग हरो हनुमान महाप्रभु,जो कछु सं कट होय हमारो ।
को ननहं जानत हैजग मेंकनप,सं कटमोिन नाम नतहारो ॥8॥॥
|| दोहा ||
॥लाल देह लाली लसे,अरू धरर लाल लंगूर ।
बज्र देह दानव दलन,जय जय जय कनप सूर ॥
॥ इनत सं कटमोिन हनुमानाष्टक सम्पूणव ॥

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श्री बजरंग बाण
जय हनुमं त सं त नहतकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज नबलं ब न कीजै। आतुर द रर महा सुख दीजै॥
जैसे कू नद चसंधु मनहपारा। सुरसा बदन पैनठ नबस्तारा॥
आगे जाय लं नकनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय नबभीषन को सुख दीन्हा। सीता ननरचख परमपद लीन्हा॥
बाग उजारर चसंधु महूँ बोरा। अनत आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कु मार मारर सं हारा। लूम लपेनट लं क को जारा॥
लाह समान लं क जरर गई। जय जय धुनन सुरपुर नभ भई॥
अब नबलं ब के नह कारन स्वामी। कृ पा करहु उर अंतरयामी॥

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|| दोहा ||
ननश्चय प्रेम प्रतीनत ते, नबनय करैं सनमान।
तेनह के कारज सकल शुभ, चसद्ध करैं हनुमान॥
|| चौपाई ||

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जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु ननपाता॥
जै हनुमान जयनत बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमं त हठीले। बैररनह मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्ीं ह्ीं ह्ीं हनुमं त कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनुअरर उर सीसा॥
जय अंजनन कु मार बलवं ता। शं करसुवन बीर हनुमं ता॥
बदन कराल काल-कु ल-घालक। राम सहाय सदा प्रनतपालक॥
भूत, प्रेत, नपसाि ननसािर। अनगन बेताल काल मारी मर॥
इन्हेंमारु, तोनह सपथ राम की। राखुनाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरर सपथ पाइ कै । राम दूत धरु मारु धाइ कै ॥
जय जय जय हनुमं त अगाधा। दुख पावत जन के नह अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अिारा। ननहं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग नगरर गृह माहीं। तुम्हरे बल ह ं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरर दास कहाव । ताकी सपथ नबलं ब न लाव ॥
जै जै जै धुनन होत अकासा। सुनमरत होय दुसह दुख नासा॥
िरन पकरर, कर जोरर मनाव ं। यनह औसर अब के नह गोहराव ं॥
उठु, उठु, िलु, तोनह राम दुहाई। पायूँ पर ं, कर जोरर मनाई॥
ॐ िं िं िं िं िपल िलंता। ॐ हनुहनुहनुहनुहनुमं ता॥

ॐ हं हं हाूँक देत कनप िं िल। ॐ सं सं सहनम परानेखल-दल॥
अपने जन को तुरत उबार । सुनमरत होय आनंद हमार ॥
यह बजरंग-बाण जेनह मारै। तानह कह नफरर कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन ननहं रहै कलेसा॥
|| दोहा ||
उर प्रतीनत दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरर ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

श्री राम अितार स्तोत्र
भये प्रगट कृ पाला, दीनदयाला क सल्या नहतकारी
हरनषत महतारी, मुनन मनहारी अद्भतु रूप नबिारी
लोिन अचभरामा, तनु घनस्यामा, ननज आयुध भुज िारी
भूषन वनमाला, नयन नबसाला, सोभाचसंधु खरारी
कह दुइ कर जोरी, अस्तुनत तोरी, के नहत नबचध करूं अनंता
माया गुन ग्यानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता
करुना सुख सागर, सब गुन आगर, जेनह गावनहं श्रुनत सं ता
सो मम नहत लागी, जन अनुरागी, भय प्रकट श्रीकंता
ब्रह्मांड ननकाया, नननमवत माया, रोम रोम प्रनत बेद कहे
मम उद सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मनत चथर न रहे
उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना, िररत बहुत नबचध कीन्ह िहे
कनह कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेनह प्रकार सुत प्रेम लहे
माता पुनन बोली, सो मनत डोली, तजहु तात यह रूपा
कीजे चससुलीला, अनत नप्रयसीला, यह सुख पराम अनूपा
सुन बिन सुजाना, रोदन ठाना, होई बालक सुरभूपा
यह िररत जे गावनह, हररपद पावनह, तेनह न परनहं भवकूपा।।
॥इनत श्रीरामावतार स्तोत्र सं पूणवम््‌॥

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श्री राम-स्तुवत
श्री रामिि कृ पालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
नवकं ज-लोिन , कं ज-मुख , कर-कं ज पद कं जारुणं ॥
कदंपव अगचणत अनमत छनव , नवनील-नीरद सुं दरं ।
पट पीत मानहु तनड़त रुचि शुचि न नम जनक सुतावरं ॥
भजु दीनबं धु नदनेश दानव – दैत्यवं श – ननकं दनं ।
रघुनं द आनं दकं द क शलिं द्र दशरथ – नन्दनम् ।।
चसर मुकु ट कुं डल नतलक िारु उदारु अंग नवभूषणं ।
आजानुभुज शर – िाप – धर , सं ग्राम – चजत – खरदुषणं ॥
इनत वदनत तुलसीदास शं कर – शेष – मुनन – मन – रंजनं ।
मम हृदय – कं ज ननवास करु , कामानद खलदल – गं जनं ॥
छं द्‌: hanuman chalisa in hindi pdf
मनु जानहं रािेउ नमलनहं सो बरु सहज सुं दर साूँवरो ॥
करुणा ननधान सुजान सीलु सनेह जानत रावरो ॥
एनह भाूँ नत ग रर असीस सुनन चसय सनहत नहय हरषीं अली ।
तुलसी भवानननह पूचज पुनन पुनन मुनदत मन मंनदर िली ॥
।।सोरठा।।
जानन ग रर अनुकू ल चसय नहय हरषु न जाइ कनह ।
मं जुल मं गल मूल बाम अंग फरकन लगे ।

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श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजैहनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल सेनगररवर कांपे। रोग दोष जाके ननकट न झांके ।।
अंजनन पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लं का जारी चसया सुध लाए।
लं का सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लं का जारी असुर सं हारे। चसयारामजी के काज सं वारे।
लक्ष्मण मूचछवत पड़े सकारे। आचण सं जीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरर जमकारे। अनहरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दानहने भुजा सं तजन तारे।
सुर-नर-मुनन जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उिारे।
कं िन थार कपूर ल छाई। आरती करत अंजना माई।
लं कनवध्वं स कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरनत गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुं ठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

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